पढ़ने योग्य पाठ
संपूर्ण पाठ
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
एकदंत दयावंत, चार भुजाधारी। माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी॥
अंधन को आँख देत, कोढ़िन को काया। बाँझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥
पान चढ़े, फल चढ़े, और चढ़े मेवा। लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा॥
दीनन की लाज राखो, शंभु सुतवारी। कामना को पूर्ण करो, जग बलिहारी॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
जय गणेश देवा आरती का भावार्थ
आरती गणेश जी को पार्वती और महादेव के पुत्र, करुणामय और भक्तों की प्रार्थना सुनने वाले रूप में स्मरण करती है। इसमें एकदंत रूप, चार भुजाएं, सिंदूर और मूषक वाहन जैसे परिचित प्रतीकों का उल्लेख आता है।
अंतिम चरणों में भक्त अपनी कामना से अधिक कृपा, संरक्षण और सेवा का भाव रखता है। इसे शब्दशः वादे की तरह नहीं, श्रद्धा और प्रार्थना के काव्यात्मक रूप में पढ़ना उपयुक्त है।
आरती कैसे पढ़ें या गाएं
पूजा की अपनी पारिवारिक विधि हो तो उसी का पालन करें। सामान्य रूप से दीप प्रज्ज्वलित करने से पहले सुरक्षित स्थान चुनें, पाठ सामने रखें और आरामदायक गति से गाएं। फोन से सुनते समय स्क्रीन पर आगे बढ़ती लिरिक्स का अनुसरण किया जा सकता है।
दीप या धूप का उपयोग करते समय आग से सुरक्षा रखें और बच्चों को अकेला न छोड़ें। आरती के बाद कुछ क्षण शांत बैठना दैनिक अभ्यास को जल्दबाज़ी से बचाता है।
सामान्य प्रश्न
जय गणेश देवा आरती कब गाई जाती है?
यह गणेश पूजा, गणेश चतुर्थी और दैनिक घर की आरती में गाई जाती है। समय और क्रम पारिवारिक परंपरा के अनुसार बदल सकता है।
आरती के शब्द अलग क्यों मिलते हैं?
मौखिक और क्षेत्रीय परंपराओं के कारण कुछ पंक्तियों या वर्तनी में छोटा अंतर मिल सकता है। अपने परिवार या मंदिर में प्रचलित पाठ को प्राथमिकता दें।
क्या Pranam ऐप में यह आरती सुन सकते हैं?
हां। जय गणेश देवा प्रणाम की आरती लाइब्रेरी में उपलब्ध है और समर्थित प्लेयर पर लिरिक्स के साथ सुनी जा सकती है।
संदर्भ
परंपराएं अलग हो सकती हैं। इस पेज के तथ्य नीचे दिए गए संदर्भों और प्रणाम के प्रथम-पक्ष सामग्री संग्रह से जांचे गए हैं।
